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प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं, “परिवार के बुज़ुर्गों की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है। महिलाओं को विशेष रूप से अपने सास-ससुर और वृद्धों की देखभाल में आगे आना चाहिए। अगर वे स्वयं सेवा नहीं कर सकतीं, तो कम से कम अपने पति को इस पुण्य कार्य से न रोकें।”
वे आगे कहते हैं, “यदि आप अपने बड़ों का सम्मान नहीं करेंगे, तो भविष्य में आपको भी अपने बच्चों से वही व्यवहार मिलेगा। इसलिए अभी से सेवा और सम्मान का संस्कार डालें, ताकि आपका जीवन सुखी रहे।”
महाराज जी समझाते हैं, “यह बात याद रखें कि जो संस्कार आप आज अपने परिवार में बोएँगे, वही आगे चलकर फल देंगे। अगर आप अपने बुज़ुर्गों की सेवा करेंगे, तो आपके बच्चे भी आपसे वही सीखेंगे।”

ऑथर नोट: यह लेख अभिषेक चौहान द्वारा लिखा गया है, जिनके पास ब्लॉगिंग और आध्यात्मिक विषयों पर अच्छा अनुभव है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जानकारी और प्रेरणा के उद्देश्य से है। कृपया किसी भी आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए अपने विश्वसनीय गुरु से सलाह लें।
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